Tuesday, April 16, 2013

{ ५३७ } {April 2013}





जोडती गगन को जो धरती से
चमाचम लकीर ये बिजली की
पायल की तरह ही बजा करती
झीनी-झीनी फ़ुहार ये बदली की।।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल

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