Saturday, May 26, 2012

{ २९० } {May 2012}





खडी नजरों के आगे, आफ़त ही आफ़त
लानत ऐसे शासन पर, हुई जो बेरहमत
जेबें खाली हुईं, सिर्फ़ नून-रोटी के बाबत
महँगाई है कर रही, नव-पीढी का स्वागत।।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल

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