Saturday, May 26, 2012

{ २८६ } {May 2012}





हाथों में जब भी उनका हाथ आता है
जलतरंग सा पोर - पोर गुनगुनाता है
हिजाब में जगमगाता जब रुख उनका
हल्कए-आगोश को मन ललचाता है।।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल

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