Saturday, October 8, 2011

{ १७ } { October 2011 }






काँटों से भरे हुए चमन की बहार क्या करेंगे,
बेदर्द है जो इन्सान उससे करार क्या करेंगे,
खुदगर्ज है जो उसका इन्तजार क्या करेंगे,
मगरूर है जो खुद मे उससे प्यार क्या करेंगे।।

-- गोपाल कृष्ण शुक्ल

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